रामा रामा रटते रटते बीती रे उमरिया
रामा रामा रटते रटते बीती रे उमरिया
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रामा रामा रटते रटते बीती रे उमरिया

रामा रामा रटते रटते बीती रे उमरिया एक हिंदी गीत है जो समय बीतने और जीवन की क्षणभंगुर प्रकृति को व्यक्त करता है। गीत सुझाव देते हैं कि जीवन रेत के कणों की तरह फिसल जाता है, युवाओं की क्षणिक प्रकृति पर जोर देता है और हर पल का अधिकतम लाभ उठाने का आग्रह करता है। “राम राम रटते रटते” वाक्यांश की दोहराव प्रकृति समय बीतने की अनिवार्यता पर एक लयबद्ध प्रतिबिंब के रूप में कार्य करती है। यह गीत वर्तमान को संजोने और किसी की यात्रा को आकार देने वाले अनुभवों को महत्व देने के बारे में एक मार्मिक संदेश देता है।

रामा रामा रटते रटते बीती रे उमरिया

रामा रामा रटते रटते बीती रे उमरिया लिरिक्स

रामा रामा, रटते रटते, बीती रे उमरिया 
रघुकुल नंदन, कब आओगे , भिलनी की डगरिया,
रामा रामा रटते रटते 

मैं शबरी, भिलनी की जाई, ”भजन भाव नहीं जानु रे” 
राम तुम्हारे दर्शन के हित, “वन में जीवन पालूं रे” 
चरण कमल से निर्मल करदो, दासी की झोंपड़िया,
रामा रामा रटते रटते 

सुबह शाम नित, उठकर मै तो, “चुन चुन कर फल लाऊँगी”
अपने प्रभु के, सन्मुख रख के, “प्रेम से भोग लगाऊँगी” 
अपने प्रभु के, दर्शन करने , तरसे यह नज़रिया,
रामा रामा रटते रटते 

रोज सवेरे वन में जाकर, “रास्ता साफ़ कराती हूँ”
अपने प्रभु के खातिर वन से, “चुन चुन के फल लाती हूँ”
मीठे मीठे बेरन से भर , लाई मैं छवडिया,
रामा रामा रटते रटते

सुँदर श्याम, सलोनी सूरत, “नयनन बीच बसाऊँगी” 
पद पंकज की, रज धर मस्तक, “चरणों में सीस निवाऊँगी”

प्रभु जी मुझको, भूल गए क्या, दास की खबरिया,
रामा रामा रटते रटते 

नाथ तुम्हारे, दर्शन के हित, “मैं अबला इक नारी हूँ”
दर्शन बिन दोऊ, नैना तरसें, “दिल की बड़ी दुखियारी हूँ”
मुझको दर्शन, दे दो दयामय , डालो मेहर नजरिया

रामा रामा रटते रटते
राम राम राम, बोलो जय सिया राम 

रामा रामा रटते रटते, बीती रे उमरिया ।
रघुकुल नंदन कब आओगे, भिलनी की डगरिया ॥

conclusion

हिंदी में वाक्यांश “राम राम रटे रटते रटते पर्यटन रे उमरिया” समय बीतने के साथ “राम” नाम के दोहराव का सुझाव देता है। इसे समय बीतने और जीवन की क्षणभंगुर प्रकृति के रूपक के रूप में देखा जा सकता है। लगभग 80 शब्दों में दिया गया समापन विचार इस गहन अहसास को उजागर कर सकता है कि, लयबद्ध मंत्रोच्चार के समान, जीवन निरंतर प्रकट होता है, क्षणों की नश्वरता पर आत्मनिरीक्षण करने और प्रत्येक क्षणभंगुर क्षण को सचेतनता और उद्देश्य के साथ अपनाने के महत्व पर जोर देता है।

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